नेपाल के पहाड़ों में बिन बरफ सब सून

DW

मुम्बई

नेपाल का धामपुस गांव सैलानियों को अपनी ओर खींचता था- बर्फ से लकदक अन्नपूर्णा पर्वतऋंखला का अद्भुत नजारा देखने की चाहत भला किसे न होगी. लेकिन पिछले 12 साल से सर्दियों में बर्फबारी कम होने लगी है. बाबूराम गिरी धामपुस के एक होटल यम सकुरा में कुक हैं. अपने चूल्हे के पास खड़े बाहुराम अफसोस जताते हुए कहते हैं, "पांच साल पहले दो फुट से भी ज्यादा बर्फ पड़ी थी, लेकिन तबसे कोई खास बर्फ नहीं पड़ी यहां."

कोरोना के चलते यात्रा प्रतिबंधों ने दुनिया भर के होटलों की वित्तीय हालत को भी डगमगा दिया है. बाबूराम का कहना है कि मध्य नेपाल में रहने वाली उसकी बिरादरी नेपाली टूरिस्टों पर ही प्रमुख रूप से निर्भर थी जो सर्दियों का मौसम होते ही यहां चले आते थे. लेकिन इस साल खाली मैदान का मतलब है कम टूरिस्ट. बाबूराम ने बताया कि "जब भी बर्फ पड़ती है बहुत से लोकल और घरेलू टूरिस्ट यहां बर्फ में खेलने आते हैं लेकिन अब होटल लगभग खाली पड़े हैं."

हाल के वर्षों में भारी बर्फबारी में कमी के चलते नेपाल के पर्वतीय इलाकों में पर्यटन से खेती तक, कमोबेश सभी उद्योगों को आर्थिक चोट पहुंची है. वैज्ञानिक इस हालात को तापमान में बढ़ोत्तरी से जोड़कर देखते हैं. इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) में रीजनल प्रोग्राम मैनेजर अरुण भक्त श्रेष्ठ के मुताबिक रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी के जरिए हुए अध्ययन दिखाते हैं कि नेपाल और हिंदुकुश हिमालयी क्षेत्र में स्नो कवर तेजी से कम हुआ है. उनका कहना है, "नेपाल का तापमान प्रति दशक 0.6 डिग्री सेल्सियस के हिसाब से बढ़ रहा है."

बदलते मौसम का कमाई पर असर

नेपाल के जल-विज्ञान और मौसम विभाग की दिसम्बर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भविष्यवाणी की गयी थी कि सर्दियों में देश का औसत तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा और औसत बर्फबारी सामान्य से कम होगी. होटल यम सकुरा के मालिक बुद्धि मान गुरुंग को लगता है कि कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन के मिलेजुले असर की वजह से पिछले साल के मुकाबले इस साल 80 परसेंट कमाई गिर गयी है. वो कहते हैं, "स्टाफ को सैलरी देने के लाले पड़ रहे हैं."

प्रकाशित तारीख : 2021-02-15 13:35:00

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